
श्री रामलीला समिति,बक्सर के तत्वावधान में रामलीला मैदान स्थित विशाल मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दौरान आज सातवां दिन शनिवार को श्रीधाम वृंदावन से पधारी सुप्रसिद्ध रामलीला मण्डल श्री श्यामा श्याम रासलीला संस्थान के स्वामी श्री नन्दकिशोर रासाचार्य जी के सफल निर्देशन में दिन में कृष्ण लीला के दौरान ‘मीराबाई चरित्र भाग-2 लीला’ के प्रसंग का मंचन किया गया। जिसमें दिखाया गया कि मीराबाई को उनके ससुराल में पति के निधन के पश्चात् जान से मारने का तरह तरह का प्रयोग करने के बावजूद भी मीराबाई बच जाती है। हरेक बार नारायण उनकी रक्षा करते हैं। जिससे मीराबाई के के घर के लोग घबरा जाते हैं। यह देख मीराबाई की भक्ति और बढ जाती है वह महल को छोड़ वैराग्य को धारण कर लेती है। इस दृश्य को देख दर्शक भाव विभोर हो जाते हैं । वहीं देर रात्रि मंचित रामलीला के दौरान ‘धनुष यज्ञ’ प्रसंग का मंचन किया गया। जिसमें दिखाया गया कि राजा जनक भोलेनाथ से धनुष लेकर महलों में आते हैं और नित्य दिन उसकी पूजा करते हैं। एक दिन राजा जनक किसी कार्यवश महलों से बाहर होते हैं। उस दिन महारानी धनुष की पूजा करना भूल जाती है। यह देख सीता जी ने अपने एक हाथ से धनुष को उठाकर गोबर का चौका लगाकर उसका पूजन किया। यह बात जब राजा जनक है ने सुना कि जानकी ने एक हाथ से धनुष को उठाकर उसका पूजन किया तो उसी समय यह घोषणा करवा देते हैं, कि जो राजा इस धनुष खंडन करेगा, उसी से मेरी किशोरी का विवाह होगा। इसके लिए वह स्वयंवर का आयोजन करवाते है। सभा कक्ष तैयार किया जाता है। वहाँ विश्वामित्र सहित राम और लक्ष्मण भी आते हैं । जनक जी उनको उच्च आसन पर बिठाते हैं। सभागार देश देशांतर से आए हुए राजाओं से भर जाता है। तभी बाणासुर और रावण का भीषण संवाद होता है। और दोनों सभागार से बाहर चले जाते हैं। तब धनुष यज्ञ की घोषणा होती है; और एक एक कर सभी राजा धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, और असफल हो जाते हैं। सभी राजाओं को धनुष उठाने में विफल होते देख जनक जी को क्रोध आ जाता है। वह सभागार के सभी राजाओं पर क्रोध करते हुए पृथ्वी को वीरों से खाली बता देते हैं। राजा जनक के इस प्रकार कहने से लक्ष्मण जी को गुस्सा आ जाता है तब श्री राम अपने गुरुदेव विश्वामित्र की आज्ञा पाकर धनुष का खंडन करते हैं। यह देख सभी देवता गण फूल बरसाते हैं । जानकी जी श्रीराम के गले में वरमाला पहनाती है । यह देख दर्शक रोमांचित हो जय श्री सीताराम का उद्घोष कर करने लगते हैं।