Fri. Jun 19th, 2026

धर्म के नाम पर अधर्म परोसने का कार्य आजकल काफी हो रहा है।सीधे-सीधे अधर्म का आचरण बहुत कम लोग करते हैं। जो अधर्म करते हैं वे,धर्म मानकर ही करते हैं। यह वास्तव में धर्म है, ऐसा जानकर अधर्म का आचरण अधार्मिक कार्य करने वाले हजारों में एक आदमी मिलेगा।लेकिन जब धर्माभाष के रूप में समाज में धर्म का नुकसान ज्यादा होने लगेगा। तो काफी समस्याएं उतपन्न होने लगेंगी। उक्त बातें लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में त्रिदंडी स्वामी की पुण्य तिथि पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को अनन्त विभूषित जगद्गुरु रामानुजाचार्य पुष्कर पीठाधीश्वर स्वामी रामचंद्राचार्य जी महाराज ने कहा। उन्होंने कहा कि प्रचार प्रसार कर बैनर पोस्टर लगा बताया जाए की अमुक तिथि से अमुक तिथि तक अधर्म सम्मेलन हो रहा है। इसमें आप सभी जरूर पधारे। तो कोई भी व्यक्ति इस कार्यक्रम में नहीं आएगा। पूरा पांडाल खाली रहेगा। लेकिन अच्छाई के नाम पर बुलाकर बुराई को अच्छे से परोसा जा सकता है। सत्संग के नाम पर आज के समय में कुसत्संग परोसा जा रहा है। अत्यधिक भीड़ लगाकर धर्म सम्मेलनों में कहा जा रहा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम श्रीकृष्णा व नारायण सहित किसी देव को मनाना नहीं है। धार्मिक सम्मेलनों में कहा जा रहा है कि,वेद, पुराण, रामायण,महाभारत व गीता को मानने से कोई फायदा नहीं है। ऐसे सम्मेलनों का परित्याग करना चाहिए।धार्मिक सम्मेलनों में गलत प्रचार करने वाले लोग अपना व्यक्तिगत धार्मिक लाभ ले रहे हैं।ऐसे में समझदारी से धर्म का काम करते रहना है। श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर हवन पूजन का कार्य गुरुवार को किया जाएगा। साथ ही त्रिदंडी स्वामी की पुण्यतिथि के मौके पर महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। जगत गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राजगोपालाचार्य जी महाराज त्यागी स्वामी जी ने बताया कि पूज्य त्रिदंडी स्वामी के पावन पुण्यतिथि पर विशेष पूजा पाठ कर भंडारा होगा। जिसमें लोगो की भीड़ उमड़ने उम्मीद है।

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