Sat. Sep 19th, 2026

आपदा प्रबंधन शाखा से प्राप्त सूचनानुसार जिला में गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी के साथ (हीट वेब) चलती है। जिसके कारण जन-जीवन प्रभावित होता है एवं आम जनता को स्वास्थ्य एवं पेयजल संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भीषण गर्मी एवं लू से बचाव हेतु विभिन्न विभाग के अधीनस्थ जिलान्तर्गत कार्यालयों के स्तर से निम्न कार्रवाई करने का निदेश दिया गया है।*

नगर विकास एवं आवास विभागः- कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद बक्सर एवं डुमराँव को निर्देश दिया गया कि शहरी क्षेत्रों एवं सार्वजनिक जगहों पर स्थानीय निकायों द्वारा पियाऊ की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी। इन स्थानों पर गर्म हवाओं एवं लू से बचाव से संबंधित सूचनाओं को भी प्रदर्शित किया जाय। ताकि आम जन इनसे भली भाँति अवगत हो सके। अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत खराब चापाकलों का मरम्मत युद्ध स्तर पर करायी जाय। नगरीय क्षेत्र में अवस्थित आश्रय स्थानों में पेयजल तथा स्लम के निवासियों हेतु आकस्मिक दवाओं की व्यवस्था की जाय।

स्वास्थ्य विभागः- असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी बक्सर को निर्देश दिया गया कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, रेफरल अस्पतालों, सदर अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों में लू से प्रभावितों के ईलाज हेतु विशेष व्यवस्था कर ली जाय। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों एंव अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में ओ0आर0एस0 पैकेट, आई0भी0 फ्लूड एवं जीवन रक्षक दवा इत्यादि की व्यवस्था कर ली जाय। अत्यधिक गर्मी से पीड़ित व्यक्तियों के ईलाज हेतु आवश्कतानुसार अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था कर ली जाय एवं लू से पीड़ित बच्चों, बूढों, गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखा जाय। आवश्कतानुसार प्रभावित जगहों हेतु स्टैटिक/चलंत चिकित्सा दल की भी व्यवस्था कर ली जाय। गर्म हवाएँ/लू से बचाव के उपाय से संबंधित आई0ई0सी0 सामग्री, स्थानीय स्तर पर मुद्रित कर पम्पलेट, पोस्टर के माध्यम से प्रचार प्रसार कराया जाय। साथ ही स्थानीय प्रचार माध्यमों का भी उपयोग किया जाय।

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रणः- कार्यपालक अभियंता लोक स्वास्थ्य प्रमंडल बक्सर को निदेश दिया गया कि खराब चापाकल का मरम्मत युद्ध स्तर पर किया जाय। जिन स्थानों पर नल का जल नहीं पहुँचाता हो एवं चापाकलों में पानी की कमी हो गयी हो, वहाँ आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा पेयजल संकट से निपटने हेतु निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार टैकरों की माध्यम से पेयजल पहुँचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। भू गर्भ जल स्तर की लगातार समीक्षा की जाए एवं इस पर सतत निगरानी रखी जाय।

शिक्षा विभागः- जिला शिक्षा पदाधिकारी बक्सर को निदेश दिया गया कि स्कूली बच्चों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय या तो सुबह की पाली में ही संचालित हो अथवा गर्मी की छुटियाँ निर्धारित समय से पूर्व घोषित कर दी जाय। गर्मी की स्थिति को देखते हुए स्कूलों को अल्प अवधि के लिए बंद किया जा सकता है। इस हेतु जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा समीक्षा कर ससमय प्रतिवेदन देने को कहा गया। सभी स्कूलों एवं परीक्षा केन्द्रों में पेयजल ओ0आर0एस0 की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।

जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आई0सी0डी0एस0 बक्सर को निर्देश दिया गया कि सभी आँगनबाड़ी केन्द्रों पर पेयजल की समुचित व्यवस्था करायी जाय एवं वहाँ पर गर्म हवाएँ/लू से बचाव से संबंधित आई0ई0सी0 (बच्चों को समझने हेतु) सामग्री प्रदर्शित कर आमजन को जागरूक किया जाय। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आँगनबाड़ी केन्द्रों पर जीवन रक्षक घोल की व्यवस्था की जाय। नवजात, शिशु, बच्चों, धातृ एवं गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से विशेष चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की जाय।

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभागः- जिला पशुपालन पदाधिकारी एवं जिला मत्स्य पदाधिकारी बक्सर को संयुक्त रूप से निदेश दिया गया कि सरकारी टयूबवेल के समीप अथवा अन्य सुविधा युक्त गडढा खुदवा कर पानी इकटठा किया जाय, ताकि पशु-पक्षियों को पानी मिल सके। पशुओं के बीमार पड़ने पर चिकित्सा दल की व्यवस्था की जायेगी।

ग्रामीण विकास विभागः- कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग बक्सर एवं डुमराँव को संयुक्त रूप से निदेश दिया गया कि मनरेगा अंतर्गत तालाबों/आहर इत्यादि की खुदाई की योजनाओं में तेजी लायी जाए। जिससे इनमें पानी इकटठा कर पशु-पक्षियों को पानी उपलब्ध कराया जा सके। लू चलने पर मनरेगा की कार्य अवधि को सुबह 06:00 बजे से 11:00 बजे तक तथा अपराहन 03:30 बजे से 06:30 बजे तक निर्धारित किया जाय। कार्य स्थल पर पेयजल तथा लू लगने पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाय।

पंचायती राज विभागः- विभाग द्वारा पंचायतों में लू चलने के दौरान क्या करे क्या न करें का प्रचार प्रसार कराया जाय। गाँवों में पेयजल की व्यवस्था हेतु पंचायतों को कार्य योजना बनाने हेतु निदेशित किया जाय तथा जल संरक्षण की योजनाओं पर कार्य किया जाय।

श्रम संसाधन विभागः- श्रम अधीक्षक बक्सर को निदेश दिया गया कि लू से बचाव हेतु मजदूरों के कार्य अवधि को लचीला किया जाय। लू चलने पर कार्य अवधि को सुबह 06:00 बजे से 11:00 बजे तक तथा अपराहन 03:30 बजे से 06:30 बजे तक निर्धारित किया जाय। कार्य स्थल पर पेयजल की व्यवस्था तथा लू लगने पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाय। खुले मे काम करने वाले, भवन बनाने वाले तथा कुटीर उद्योग/लघु उद्योग/कल करखानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए पेयजल, आईस पैड की व्यवस्था के साथ शेड की भी व्यवस्था की जाय। साथ ही लू से बचाव हेतु औद्योगिक मजदूरों के बीच जागरूकता कैम्प लगवाया जाय।

परिवहन विभागः- जिला परिवहन पदाधिकारी बक्सर को निदेश दिया गया कि लू की अवधि में जहाँ तक संभव हो, वाहनों का परिचालन कम से कम करना चाहिए तथा पूर्वाहन 11:00 बजे से अपराहन 03:30 बजे तक सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियों के परिचालन को नियंत्रित की जाय। सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियों में पेयजल तथा ओ0आर0एस0 के साथ-साथ प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाय।

ऊर्जा विभागः- कार्यपालक अभियंता विद्युत प्रमंडल बक्सर को निदेश दिया गया कि प्रायः बिजली के तारों के ढीला रहने के कारण वे हवा चलने पर आपस में टकराते रहते है, जिनसे चिनगारी निकलने की संभावना रहती है। इन चिनगारियों के कारण भी आगलगी की घटनाएँ होती है। अतएव बिजली के ढीले तारों को भी ठीक करवाने की व्यवस्था कर ली जाय। निर्बाध बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था की जाय।

पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तनः- अनुमण्डल पदाधिकारी बक्सर एवं डुमराँव को संयुक्त रूप से निदेश दिया गया कि गर्मियों के दिनों में लू चलने से वन्य जीव भी प्रभावित होते है। वन्य जीव उद्यानों तथा अभ्यारण्यों में पानी की व्यवस्था की जाय। पर्यटन स्थल पर पेयजल की व्यवस्था की जाय। साथ ही लू से बचाव हेतु पर्यटकों के लिए एडभाईजरी संबंधित अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा निर्गत किया जाय।

*राज्य अग्निशमन निदेशालय:- जिला अग्निशमन पदाधिकारी बक्सर को निदेश दिया गया कि भीषण गर्मी के कारण अगलगी की घटनाओं में भी वृद्धि हो जाती है। आगलगी की घटनाओं से निपटने एवं उनके रोकथाम के लिए एतद विषयक विभागीय मानक संचालन प्रक्रियानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करायी जाय।

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