Mon. Apr 20th, 2026

*बक्सर जिले में 12 और 13 फरवरी 2025 को जलछाजन यात्रा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह यात्रा जल संरक्षण के प्रति जागरुकता लाने और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY 2.0) के तहत हो रहे कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने का एक अनूठा प्रयास है।*

यात्रा का कार्यक्रमः-

12 फरवरी 2025ः परियोजना क्षेत्र 1 (चौगाई) एवं

13 फरवरी 2025 को परियोजना क्षेत्र 2 (समुदायिक पोखरा, उनवास, इटाढी)

*उप निदेशक (कृषि अभियंत्रण) भूमि संरक्षण बक्सर द्वारा बताया गया कि भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित वाटरशेड यात्रा आउटरीच प्रोग्राम जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालने हेतु यह आयोजित की जा रही हैं। जिसमे किसानों के बीच सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना, जल-संचयन तकनीकों से अवगत तथा जलझाजन योजना अंतर्गत चल रहे कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराना है।*

*यात्रा में आयोजित होंगी रोचक गतिविधियांः*

*पानी का पाठशालाः KVK वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा जल संरक्षण के बारे में जानकारीपूर्ण सत्र।*

*विद्यालयों में पेंटिंग तथा क्विज प्रतियोगिताः बच्चों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए।*

*वाटरशेड मार्गदर्शक का सम्मान जिन्होंने भूमि तथा जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं।*

*नुक्कड़ नाटकः जल संरक्षण के महत्व पर नाटय प्रस्तुति।*

*भूमि पूजनः नए जल-संरक्षण संरचनाओं का भूमि पूजन।*

*लोकार्पणः पूर्ण हो चुकी जल-संरक्षण संरचनाओं का लोकार्पण।*

*श्रमदानः जल संरक्षण कार्यों में श्रमदान ।*

*AR अनुभवः यात्रा वहान में जलछाजन परियोजनाओं का Augmented Reality (AR) के माध्यम से अनुभव।*

*भूमि और जल संरक्षण शपथः प्रतिभागियों द्वारा भूमि और जल संरक्षण की शपथ।*

*मृदा संरक्षणः कृषि और भविष्य का आधारः- मिट्टी हमारे जीवन का आधार है, और इसका संरक्षण कृषि उत्पादकता और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भूमि संरक्षण प्रबंधन से वर्षा जल का संरक्षण और उपयोग करना, मिट्टी के कटाव को रोकना, भूजल स्तर को बढ़ाना, और जल संसाधनों का समुचित उपयोग करना है। जलछाजन यात्रा भूमि संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने और किसानों को भूमि-स्वास्थ्य सुधारने के लिए प्रेरित करेगी।*

*प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY 2.0) का लक्ष्य जल संसाधनों का कुशल उपयोग और प्रबंधन करके सिंचाई क्षमता बढ़ाना और कृषि में आत्मनिर्भरता लाना है। इसके अंतर्गत मेड़बंदी, तालब निर्माण, चेकडैम, आहार/पाइन जीर्णोद्धार, सामुदायिक तालाब जिरोधार परकोलेशन टैंक, आदि के साथ साथ कृषि-वानिकी, वृक्षारोपण और उद्यानिकी को बढ़ावा देना।*

*आइए, जलछाजन यात्रा में शामिल हों और जल संरक्षण के इस महाकुंभ का हिस्सा बनें।*

“जल है तो कल है“

“बूंद-बूंद से सिंचाई”

“जल संरक्षण की कमाई“

“मिट्टी बचाओ, देश बचाओ“

“हर खेत को पानी, हर किसान को समृद्धि।

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