NRI रवि चांद जी जिन्होंने दुबई से सामग्री भेजी
NRI. रवि चांद जी के द्वारा भेजा गया ऑक्सीजन फ्लो मीटर।

रवि चांद ने अपनी जन्मभूमि की मदद को भेजी दुबई से सामग्री
कोविड महामारी में बक्सर के एनआरआई आए आगे
अब सदर अस्पताल में फ्लो मीटर की कमी होगी दूर
बक्सर। कोरोना की दूसरी लहर में दवा, इलाज और एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहे मरीजों की मदद के लिए जिले के अप्रवासी भारतीय आगे आएं हैं। महामारी के दौर में इनके जरिए मदद पाने वाले इन्हें फरिश्ता बता रहे हैं। वहीं, लोग भी इनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं।
परदेश में रहने के बाबजूद अपनी मिट्टी से प्यार कम नहीं हुआ। तभी तो कोविड़ 19 के दूसरे संक्रमण के दौर स्थिति सही नही होने की जानकारी मिलने पर येअपनी जन्मभूमि बक्सर में भी मदद की जरूरत महसूस होने के बाद बक्सर के लाल से नहीं रहा गया। दुबई में रहने वाले बक्सर के एनआरआई रवि चांद ने अन्य देशों में रहने वाले एनआरआई का ग्रुप बनाया और मदद के लिए कूद गए। अपनी जन्मभूमि बक्सर के लिए एनआरआई का समूह बनाकर राहत सामग्री भेजने का काम किया है। मालूम हो कि अम्बेडकर ग्लोबल के निदेशक सह बक्सर के डुमरांव अनुमंडल के एकौनी गांव के रहने वाले एनआरआई रवि शंकर चांद ने कोविड महामारी के बीच अपने जिले में मास्क, सेनेटाइजर, फ्लो मीटर और नकद राशि की मदद उन्होंने रेडक्रॉस को की है। यह बक्सर के लोगों के लिए राहत की खबर है। अस्पताल में इनके द्वारा भेजे जा रहे फ्लो मीटर से मरीजों को मदद मिलेगी। एनआरआई रवि ने कहा कि वे राहत सामग्री भेजने के लिए फ़ॉल्स पॉइंट बनने पर सहमत हुए हैं और उन्होंने आंशिक रूप से योगदान दिया है। रवि ने बताया कि अम्बेडकर ग्लोबल विभिन्न देशों के बुद्धिजीवियों द्वारा गठित एक अंतरराष्ट्रीय समूह है, जो बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के कार्यों से दुनिया भर में समाज के लिए एक जुनून के साथ मार्गदर्शन का उद्देश्य रखती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फ्लोमीटर जिसकी कमी भारत में है।इसे गंभीरता से लेते हुए दुबई से शिपमेंट भेजा गया है। 40 फ्लोमीटर जो भारत में पूर्ण रूप से कम है, पहले ही बक्सर के लिए भेजा जा चुका है। बताया की
डीएम बक्सर जिला प्रशासन को हमने तत्काल सहायता के लिए 2500 मास्क, उच्च गुणवत्ता और सैनिटाइज़र और 40 फ्लो मीटर दिया है। वहीं बक्सर रेडक्रॉस सोसायटी को 5001 नकद के साथ दान किया गया है।
हेल्थ वर्कर के प्रति गंभीर है चांद
बक्सर सदर अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में मौजूदा समय में कार्य कर रहे हेल्थ वर्कर के प्रति गंभीर है। बताया की हेल्थ वर्कर के लिए जिला प्रशासन से बात की गई है। जिले विभिन्न अस्पतालों में कार्यरत नर्स और कोविड स्टाफ को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। हम इस महत्वपूर्ण समय में उनके प्रयासों की सराहना करते हैं। सभी को पीपीई किट, हेड सर्जिकल कैप और सैनिटाइज़र के साथ उच्च गुणवत्ता का एक मिल्टो लंच बॉक्स दिया जायेगा।हमारा समूह इस स्थिति में लगातार निगरानी कर रहा है। हमें किसी भी सहायता के लिए व्हाट्सएप पर किया जा सकता हैं। +971502310625 है।
डुमरांव के एकौनी के रहने वाले है चांद
आपको बता दें कि रवि शंकर चांद मुख्य रूप से नवादा चौक आरा के रहने वाले हैं।लेकिन जन्मभूमि बक्सर के डुमरांव का एकौनी गांव है। वे पिछले 12 वर्षों से दुबई में हैं। वे उनके बक्सर और बिहार से एक एनआरआई का पहचान रखने वाले कई लोगों ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए कोविड महामारी में मदद की एक पहल की है। आरा की मदद के बाद जब उन्हें बक्सर की स्थिति मालूम हुई तो उनसे रहा नहीं गया।क्योंकि बक्सर उनकी जन्मभूमि है। बक्सर के प्रमुख एनआरआई जो इस पहल का समर्थन कर रहे हैं।उनमें ग्राम सतोपट्टी सेमरी से डॉ रुद्र नारायण दुबे, वह न्यू जर्सी, अमेरिका में रहते है और एक चिकित्सा वैज्ञानिक है। उनके माता-पिता अब रांची में रह रहे हैं। डॉ चंद्र भूषण चौबे, ग्राम अहिरौली से और मेक्सिको में विश्वविद्यालय में निदेशक हैं। उन्होंने जेएनयू से पढ़ाई की है। बिक्रमगंज से डॉ युक्तेश्वर कुमार वे बाथ, इंग्लैंड में डिप्टी मेयर और यूके में डीआई मेयर बनने वाले पहले भारतीय और गैर-श्वेत हैं। उन्होंने जेएनयू और इंग्लैंड में प्रोफेसर से भी अध्ययन किया है। अनुपम पांडे, ग्राम रामपुर से डुमरांव के पास से है।वे कैलिफोर्निया, अमेरिका से टाटा कंसल्टेंसी सर्विस में काम कर रहे हैं। वहीं सुमन चतुर्वेदी, प्रिंसिपल, इंटर कॉलेज डुमरांव, श सुनील चौबे और खिरौली के आलोक गौतम, जिन्होंने यदुवंश चौबे मेमोरियल ने आंशिक रूप से इस प्रयास में योगदान दिया। पहल का नेतृत्व कर रहे रवि शंकर चांद ने कहा कि भोजपुर में समुदाय को एकजुट करना और मदद करना हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमें अपने समाज को वापस देना है और सरकार को दोष नहीं देना है। हम आरा में एक गाँव को गोद लेने के बाद बक्सर में भी एक गांव को गोद लेने की योजना बना रहे हैं। मालूम हो की लॉकडाउन के दौरान भी उन्होंने 30 चार्टर्ड उड़ानों को किराए पर लेकर बिहार में 6000 मजदूर भेजा था। रवि शंकर चांद को पहले से ही बिहार समेत भारत में बजरंगी भाईजान के रूप में जाना जाता है।