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बक्सर। ऐतिहासिक किला मैदान स्थित विशाल रामलीला मंच पर रविवार की देर शाम श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आजादी-पूर्व से चली आ रही पारंपरिक 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव का वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलाचरण के बीच भव्य शुभारंभ हुआ।

लक्ष्मी नारायण मंदिर के पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य महंत श्री राजगोपालाचार्य ‘त्यागी जी’ महाराज के कर-कमलों से विधिवत पूजा-अर्चना एवं आशीर्वचन के साथ महोत्सव का उद्घाटन हुआ।

पूजन कार्य विद्वान पंडित छविनाथ त्रिपाठी, संजय शास्त्री ,मनोज मिश्रा सहित प्रतिष्ठित विद्वत जन ने संपन्न कराया, जबकि समिति के अध्यक्ष श्री रमेश गोयल यजमान रहे। इस दौरान विभिन्न मंदिरों से पधारे वेदपाठी ब्रह्मचारियों ने वैदिक अनुष्ठान में सहयोग किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष श्री रमेश गोयल ने की। संचालन कोषाध्यक्ष सह प्रवक्ता श्री सुरेश संगम ने, स्वागत भाषण सचिव श्री बैकुंठनाथ शर्मा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी श्री हरिशंकर गुप्ता ने किया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार के शिक्षामंत्री मिथिलेश तिवारी, विशिष्ट अतिथि विधान पार्षद जीवन कुमार एवं नगर परिषद मुख्य पार्षद कमरून निशा जी मुख्य रूप से उपस्थित थीं।

श्री श्री 1008 स्वामी राजगोपालाचार्य ‘त्यागी जी’ महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि बक्सर की पावन धरती भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुड़ी है। यहां की रामलीला एवं कृष्ण लीला सनातन संस्कृति, भक्ति और संस्कारों की जीवंत परंपरा हैं। श्रीराम के जीवन से मर्यादा, सत्य एवं धर्म तथा श्रीकृष्ण की लीलाओं से प्रेम, भक्ति और धर्म-संस्थापना की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि इन लीलाओं का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने समिति को इस परंपरा के संरक्षण के लिए साधुवाद देते हुए महोत्सव की सफलता तथा बक्सरवासियों के सुख-शांति की मंगलकामना की।

समारोह के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के माननीय शिक्षामंत्री श्री मिथिलेश तिवारी जी ने कहा कि बक्सर धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी विशिष्ट पहचान रखता है। आजादी-पूर्व से निरंतर आयोजित हो रही रामलीला इसी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि रामलीला भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, त्याग, सत्य एवं धर्म का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। ऐसी सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण समाज, जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

विशिष्ट अतिथि नगर परिषद, बक्सर की मुख्य पार्षद श्रीमती कमरून निशा जी ने कहा कि बक्सर की रामलीला धार्मिक आस्था के साथ नगर की सांस्कृतिक पहचान भी है। उन्होंने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए आयोजन की सफलता में नगर परिषद की ओर से यथासंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

समिति के सचिव श्री बैकुंठनाथ शर्मा ने कहा कि रामलीला समिति इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को निरंतर भव्य एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले नगरवासियों, जिला प्रशासन, मीडिया तथा सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

महोत्सव के प्रथम दिन वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध श्री बालकृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के स्वामी एवं निर्देशक स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज जी के निर्देशन में गणेश पूजन, श्रीराम-जानकी पूजन एवं आरती के पश्चात ‘नारद मोह लीला’ का भावपूर्ण मंचन किया गया।

लीला में देवर्षि नारद के तप एवं भक्ति से उत्पन्न अहंकार तथा भगवान विष्णु की लीला के माध्यम से उनके मोहभंग और आत्मबोध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रसंग ने दर्शकों को अहंकार त्याग, विनम्रता एवं भक्ति का संदेश दिया। लीला के दौरान पूरा पंडाल धार्मिक जयकारों से गूंज उठा।

इस अवसर पर दक्षिण बिहार प्रांत कार्यवाह राजेन्द्र प्रसाद, गंगा समग्र दक्षिण बिहार प्रांत संयोजक शंभुनाथ पाण्डेय, समिति के श्री रोहतास गोयल, श्री कृष्णा वर्मा, श्री उदय सर्राफ ‘जोखन’, श्री सुशील मानसिंहका, श्री निर्मल कुमार गुप्ता, श्री प्रियेश कुमार प्रिंस, श्री सुमित मानसिंहका, श्री पंकज मानसिंहका, श्री चिरंजीलाल चौधरी, श्री ब्रजमोहन सेठ, श्री राजेश चौरसिया, श्री राजकुमार गुप्ता, श्री बासुकीनाथ सिंह, श्री नारायण राय, श्री दिनेश सिंह, श्री मदन जी दूबे, श्री राकेश राय, श्री शशिकांत चौधरी सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य तथा बड़ी संख्या में समाजसेवी, साहित्यकार, व्यवसायी, जनप्रतिनिधि एवं राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे

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