श्री सीताराम विवाह महोत्सव स्थल, नया बाजार, बक्सर में आयोजित श्री श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सप्तम दिवस पर श्रद्धालु भक्तों की विशाल उपस्थिति में कथा का रसपान कराया गया। कथा व्यास ने अत्यंत भावपूर्ण एवं सरल शैली में भगवान श्रीकृष्ण एवं भक्तों के दिव्य चरित्रों का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का संदेश प्रदान किया।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र भक्त सुदामा के चरित्र के माध्यम से सच्ची मित्रता, निष्काम भक्ति तथा भगवान की भक्तवत्सलता का मार्मिक संदेश दिया गया।
इसके उपरांत भगवान दत्तात्रेय जी के 24 गुरुओं की प्रेरणादायक चर्चा करते हुए बताया गया कि मनुष्य यदि सीखने की भावना रखे तो प्रकृति का प्रत्येक तत्व उसका गुरु बन सकता है। कथा में जीवन को सदाचार, संयम, विनम्रता एवं आत्मचिंतन के साथ जीने की प्रेरणा दी गई।
अंत में राजा परीक्षित को श्री शुकदेव जी महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराने तथा कथा-श्रवण के प्रभाव से राजा परीक्षित को प्राप्त मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन किया गया। वक्ता ने कहा कि श्रद्धा एवं विश्वासपूर्वक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होकर उसे भगवान की कृपा एवं अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बनाया।