इस कार्यक्रम की अपार सफलता के लिए अवर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी -सह- जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर की सचिव श्रीमती नेहा दयाल ने कहा कि मध्यस्थता (Mediation) विवाद निपटारे का एक प्रभावी, गोपनीय और स्वैच्छिक तरीका है, जिसमें समय और लागत दोनों की बचत होती है। यह प्रक्रिया न केवल न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करती है, बल्कि पक्षों के आपसी संबंधों को भी बनाए रखने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता में किसी भी प्रकार का निर्णय थोपने के बजाय, एक निष्पक्ष मध्यस्थ पक्षों के बीच बातचीत और सहयोग को प्रोत्साहित करता है ताकि दोनों पक्ष एक स्वीकार्य और स्थायी समाधान तक पहुँच सकें।
दिन भर के लिए चले इस कार्यक्रम के अंतर्गत आज बक्सर के विभिन्न प्रखंडों में श्री शत्रुघ्न सिन्हा एवं चंद्रकला वर्मा पैनल अधिवक्ता द्वारा जारिगामा गांव में, मंजू कुमारी द्वारा गौरा गांव में, कविंद्र पाठक द्वारा जोकहीं दियर पंचायत में, साथ ही श्री अविनाश कुमार श्रीवास्तव द्वारा बक्सर जिले के पोखराहा, बनवा पंचायत में विधिक जागरूकता का कार्यक्रम किया गयाl कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैसे व्यक्तियों को चिन्हित कर न्यायालय के समक्ष लाना है जिन्होंने इस न्यायालय में अपना वाद दायर कर रखा है और उस वाद में सुलह की संभावना हैl