
“रंगमंच समाजिक कुरितियो को दूर करने सशक्त माध्यम है-संगम” डिस्ट्रिक्ट आर्टिस्ट एसोसिएशन ऑफ़ बक्सर “डाब” के तत्वाधान में स्थानीय रेड क्रॉस भवन में हिंदी रंगमंच की 155 वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर हर्षोल्लास मनाई गई। जिसके तहत *सेमिनार- सह सम्मान समारोह तथा रंगारंग कार्यक्रम रखा गया था। वही हिन्दी साहित्य, रंगकर्म व समाजिक कार्य के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान के लिए बक्सर एसडीएम श्री धीरेंद्र मिश्रा, नगर चेयर मैन कैमरून निशा, डा सी एम सिंह, डा महेंद्र प्रसाद, भोजपुरी साहित्य मंडल के अध्यक्ष अनिल त्रिवेदी, प्रख्यात समाज सेवि रामस्वरूप अग्रवाल, साई मंदिर के सचिव श्री चंदन गुप्ता, डा एक के सिह को शाल, मोमेंटो व प्रशस्तिपत्र से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बक्सर के चर्चित व प्रख्यात रंगकर्मी सह अधिवतका सुरेश संगम तथा संचालन रेडक्रास सचिव डा श्रवण कुमार तिवारी ने की। कार्यक्रम का उद्घाटन बक्सर नगर की चेयरमैन श्रीमती कैमरून निशा व प्रख्यात गायक व नायक गोपाल राय ने संयुक्त रूप से की। डाब के अध्यक्ष सुरेश संगम ने सेमिनार को संबोधित करते हुए बताया कि भारतेंदु हरिश्चंद्र के दोस्त ईश्वर नारायण सिंह के प्रयास से हिंदी में प्रथम नाट्य प्रस्तुति *जानकी मंगल पंडित* शीतला प्रसाद त्रिपाठी द्वारा बनारस थिएटर में 3 अप्रैल 1868 को संपन्न हुई थी। इसके बाद एक सिलसिला चल निकला जिसमें रणधीर प्रेम मोहनी एवं सत्य हरिशचंद्र शजैसे नाटकों का मंचन हुआ। हिंदी के इस प्रथम नाट्य मंचन के साथ 3 अप्रैल को हिंदी रंगमंच दिवस के रूप में अमृतलाल नागर ने इसे लोकप्रिय करने एवं मनाने पर जोर दिया, तब से यह परंपरा चल पड़ी । उन्होंने आगे कहा की भारत में आजकल जो रंगमंच की दशा है वह संतोषजनक नहीं है। भारत की आजादी में भारतीय रंगमंच का बहुत बड़ा हाथ है । आदि काल से रंगमंच समाजिक कुरीतियो को दूर करने मे महत्वपूर्ण भूमिका रहा है। आजादी के बाद इसमें एक भटकाव आ गया 1950 से लगभग अब तक भारतीय रंगमंच की दशा गिरती गई इसका मुख्य कारण भारतीय फिल्म, टेलीविजन, आजकल तो व्हाट्सएप और फेसबुक के आकर्षण ने भारतीय रंगमंच को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। वही डॉक्टर महेंद्र प्रसाद में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा नाटक के लिए श्रद्धा का होना बहुत ही जरूरी है एक्टिंग एक ऐसी चीज है जो आत्मा से निकलती है । गोपाल राय ने कहा कि रंगमंच एक माध्यम है। कलाकार भाव एम संवादों से समाज का नया आयाम दे सकता है । हमें सामाजिक विकृतियों को दूर करने का प्रयास करना होगा इस अवसर पर विभिन्न विधाओं से जुड़े कलाकारो व साहित्यकार ने भी अपने उदगार व्यक्त किये। धन्यवाद ज्ञापन सचिव अभिषेक जायसवाल, रवि वर्मा व मनीश मिश्रा ने संयुक्त रूप से की। सेमिनार मे शामिल व्यक्तियों में मुख्य रूप से महासचिव हरिशंकर गुप्ता, रवि रामस्वरूप अग्रवाल, डा ओमप्रकाश केशरी पवननदन, डा शशांक शेखर, रमेश कुमार, रवि शर्मा , आर्यन जयसवाल प्रदीप जायसवाल मनोज चौबे, निर्मल सिंह, कुमार, आदि भी थे।