इस अखिल सृष्टि में एकमात्र सत्य ही सर्वश्रेष्ठ तत्व है सत्य तो यही है कि सत्य पर ही संपूर्ण लोक टिका है ।सत्य के अतिरिक्त और कोई दूसरा आधार भी नहीं है। मानव समाज के उद्धार का सत्य से बड़ा यज्ञ, सत्य से बड़ा तप , सत्य से बड़ा धर्म तथा सत्य से बड़ा दान और कुछ भी नहीं है । पक्षियों ने कहा हे जैमिनी जी महाराज हरिश्चंद्र ने सत्य के प्रभाव से ही पत्नी, पुत्र एवं प्रजl जनों के साथ उत्तम लोक को प्राप्त किए । जैमिनि ने पूछा हरिश्चंद्र जी किस सत्य का पालन किए ?चारों पक्षियों ने बताया हे तपोनिधि एक दिन स्वर्ग में विश्वामित्र तथा वशिष्ठ जी में एक बात पर विवाद हो गया की मृत्यु लोक में सर्वश्रेष्ठ सत्यवादी कौन है महर्षि वशिष्ठ का कथन था की सर्वश्रेष्ठ सत्यवक्ता महाराज अयोध्या नरेश हरिश्चंद्रजी हैं जबकि विश्वामित्र जी इससे सहमत नहीं थे ।एक समय महर्षि वशिष्ठ 12 वर्षों के लिए जल में तप करने चले गए, विश्वामित्र को यह समय अनुकूल लगा और वह ब्राह्मण बनकर हरिश्चंद्र से संपूर्ण राज्य दान करा लिए। दान करने के बाद राजा को पता चला की छल तथा कपट से मेरे राज्य का हरण किया गया फिर भी इसलिए प्रतिकार नहीं किया कि जैसे भी हो मैंने वचन दे दिया है तो अपने सत्य की रक्षा करना मेरा धर्म है। राजा ने अपनी पत्नी , पुत्र रोहित तथा स्वयं को एक डोम के हाथों बेच दिया किंतु अपना वचन असत्य नहीं होने दिया ।आज समाज में सत्य की ही शव यात्रा निकाली जा रही है चाहे वह धर्माचार्य हो राजनीतिक हो या सामाजिक हो सभी जगह पर सत्य की हत्या तथा असत्य का पोषण हो रहा है ।संपूर्ण मानव समाज सत्य तथा मिथ्या तत्वों में जी रहा है यही कारण है कि सर्वत्र ही सुख शांति तथा प्रेम का नाम निशान मिट गया है। असत्य से बढ़कर दूसरा कोई पाप नहीं है ।एक असत्य को पकड़ लेने मात्र से ही संपूर्ण विपत्तियों का भंडार तथा असत्य को छोड़कर सत्य को पकड़ लेने मात्र से ही समस्त सद्गुणों का खजाना मानव समाज बन जाता है ।अतः श्री मार्कंडेय पुराण का स्पष्ट कथन है कि जो व्यक्ति सत्य का समर्थन, पोषण , पालन तथा आचरण करने वाला है वही दुनिया का सर्वश्रेष्ठ महापुरुष है तथा जो सत्य सहित होकर सत्यमय जीवन जीता है वहीं सर्वश्रेष्ठ महापुरुष संसार को भयमुक्त करने वाला सर्वश्रेष्ठ मानव है ।अतः यह पुराण यही शिक्षा देता है कि हमें सत्य का ही सेवन करना चाहिए असत्य का कदापि नहीं ।