Sat. Sep 19th, 2026

बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के तत्वाधान में एवं माननीय उच्च न्यायालय पटना के आदेशानुसार आज दिनांक 14. 03.2023 को प्ली बारगेनिंग विषय पर विधिक जगरूकता शिविर का आयोजन विधिक सेवा सदन बक्सर में किया गया इस अवसर पर जिला एवम सत्र न्यायाधीश -सह – अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार श्री अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि प्ली बारगेनिंग 5 जुलाई 2006 से भारत में प्रभाव में आया l यह एक तरीका है जिसके अंतर्गत अभियुक्त कम सजा के बदले अपने द्वारा किए गए अपराध को स्वीकार करके और पीड़ित व्यक्ति को हुए नुकसान और मुकदमे के दौरान हुए खर्चे की क्षतिपूर्ति
करके कठोर सजा से बच सकता है प्ली बारगेनिंग केवल उन अपराधों पर लागू होता है जिनके लिए कानून में 7 वर्ष से अधिक कैद की सजा का प्रावधान नहीं हैl राष्ट्र की सामाजिक आर्थिक स्थितियों को प्रभावित करने वाले अपराधों पर और किसी महिला और 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे के विरुद्ध किए गए अपराधों पर या लागू नहीं होता l जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री धर्मेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि अभियुक्ति प्ली बारगेनिंग के लिए आवेदन उसी न्यायालय में दाखिल कर सकता है जिसमें उसके द्वारा किए गए अपराध से संबंधित मुकदमा विचाराधीन है l प्ली बारगेनिंग के लिए आवेदन में मुकदमा हुआ अभियुक्त के द्वारा किए गए अपराध से संबंधित तथ्यों का संक्षिप्त वर्णन करना चाहिए l प्ली बारगेनिंग के आवेदन के साथ अभियुक्त का शपथ पत्र भी होगा कि उसने कानून के द्वारा उसके अपराध के लिए दिए गए सजा के प्रकृति एवं समय अवधि को समझने के बाद अपनी इच्छा से प्ली बारगेनिंग का चुनाव किया है और अब वह किसी भी न्यायालय के द्वारा इस अपराध के लिए पहले दोषी नहीं ठहराया गया है l न्यायालय सुनिश्चित करने के लिए कि अभियुक्त ने प्ली बारगेनिंग का आवेदन अपनी इच्छा से किया है उससे एकांत में पूछताछ करेगा जहां पर दूसरा पक्ष उपस्थित नहीं होगा l यदि न्यायालय संतुष्ट है कि यह आवेदन अधिक सुरक्षा से दाखिल किया है और अभियुक्त किसी अपराध के लिए किसी न्यायालय के द्वारा पहले दोषी नहीं पाया गया है तो न्यायालय जन संयोजक अभियुक्त एवं शिकायतकर्ता को मुकदमे का आपसी समझौता से निपटारा करने को करती है जिसमें अभियुक्त के द्वारा पीड़ित को हुए नुकसान और मुकदमे के दौरान हुए खर्च की क्षतिपूर्ति भी शामिल होती है l यदि मुकदमे का संतोषजनक हल हो जाता है तो न्यायालय उसकी रिपोर्ट तैयार करेगा जिस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी और समझौते की प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी सदस्यों के हस्ताक्षर होते हैं l यदि अभियुक्ति द्वारा किए गए अपराध के लिए कानून में न्यूनतम सजा का प्रावधान हो तो न्यायालय अभी उसको उस न्यूनतम सजा के आधी सजा तक दे सकता है यदि अभियुक्त को अच्छे चाल चलन पर अथवा भर्त्सना के पश्चात छोड़ी नहीं जा सकता तो न्यायालय अभियुक्त को कानून के द्वारा उसके अपराध के लिए दी गई अधिकतम सजा की एक चौथाई सजा तक दे सकता हैl प्ली बारगेनिंग में न्यायालय के द्वारा दिया गया निर्णय अंतिम होगा और उस निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती है l यह प्रक्रिया जिलों में बंद विचाराधीन कैदियों की सहायता करती है जो कि लंबे समय से जेल में बंद है यह प्रक्रिया उनके लिए वरदान है lयह प्रक्रिया जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों को अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है और जेलो में भीड़ भर को कम करती है l यह प्रक्रिया अभियुक्त और पीड़ित को लंबे महंगे एवं तकनीकी अदालती प्रक्रिया को सहे बिना जल्दी न्याय दिलवाती है l यह प्रक्रिया न्यायालय एवं अभियोजकों को मुकदमे के भार के प्रबंधन में और न्यायालय के भार को कम करने में सहायता करती है l
यह अपराधिक मुकदमे का कम समय में निपटारा निश्चित करती है जो कि बहुत समय से विचाराधीन हैं और आरोपी, पीड़ित एवं गवाहों के उत्पीड़न का कारक है l इस प्रक्रिया में अपराधिक मुकदमों का निपटारा शीघ्रता से होता है क्योंकि अपनी बारगेनिंग में न्यायालय के द्वारा दिए गए निर्णय के विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती और यह निर्णय अंतिम होता है l यह प्रक्रिया न्यायालय के समय और विचारण और अपील के साथ हर स्तर पर न्यायाधीशों के कामकाज पर राज्यों की लागत की बचत करती है l
इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन के सचिव बिंदेश्वरी प्रसाद पांडे, सभी विद्वान अधिवक्ता एवम पैनल अधिवक्ता इस कार्यक्रम में उपस्थित थेl

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!