
आज दिनांक 24 जनवरी 2022 को गर्ल चाइल्ड डे के अवसर पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश -सह- सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण धर्मेंद्र कुमार तिवारी ने वर्चुअल और फिजिकल दोनों मोड में गर्ल चाइल्ड दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम किया। मौके पर जन नायक कर्पूरी ठाकुर विधि महाविद्यालय की विधि छात्राओं सुषमा कुमारी, मधु मिश्रा दामिनी वर्षा, नेहा पाण्डेय, सौम्य श्रीवास्तव, गुड़िया कुमारी, मधु कुमारी, नेहा भारती, रीना कुमारी, सोनी चौबे, नेहा पाण्डेय , शालिनी, पूजा कुमारी में कविता पाठ किया और साथ ही बालिकाओं, महिलाओं पर बने गीत, लोक गीतों को गया जिसमे पैनल अधिवक्ताओं दीपिका केशरी, चंद्रकला वर्मा, आरती कुमारी, प्रीति कुमारी,, आदि ने भी हिस्सा लिया ।
मौके पर सचिव जिला प्राधिकार, बक्सर धर्मेंद्र कुमार तिवारी ने सभी विधि छात्राओ, महिला पैनल अधिवक्ताओं एवं महिला पारा विधिक स्वम सेवकों को संबोधित करते हुए गर्ल चाइल्ड डे मनाने के उद्देश्य, इसका कारण, इसके फायदे आदि के बारे में बताते हुए कहा कि भारत सरकार ने समाज में समानता लाने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य देशभर की लड़कियों को जागरूक करना है। साथ ही लोगों को यह बताना है कि समाज के निर्माण में महिलाओं का समान योगदान है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) भारत में हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने साल 2008 में की थी। इस दिन देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें सेव द गर्ल चाइल्ड, चाइल्ड सेक्स रेशियो और बालिकाओ के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण बनाने सहित अन्य जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस को मनाने के लिए 24 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन साल 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी।
राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाए जाने का उद्देश्य समाज में बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य
हमारे समाज के लोगों के बीच लड़कियों के अधिकार को लेकर जागरूकता पैदा करना और लड़कियों को नया अवसर मुहैया कराना। साथ ही यह सुनिश्चित करना कि हर लड़की को मानवीय अधिकार मिले। लैंगिक असमानता को लेकर जागरूकता पैदा करना। बालिकाओं की समस्या का समाधान। महिलाओं को समाज में जिन असमानताओं का सामना करना पड़ता है, उन सभी से उन्हें छुटकारा दिलाना है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस का महत्व
भारत सरकार ने समाज में समानता लाने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य देशभर की लड़कियों को जागरूक करना है। साथ ही लोगों को यह बताना है कि समाज के निर्माण में महिलाओं का समान योगदान है। इसलिए इसमें सभी क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया है। उन्हें जागरुक किया गया है कि लड़कियों को भी निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।
क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस
समाज में लड़कियों की स्थिति में सुधार के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। महिलाओ को अपने घरों, कार्यस्थलों और दैनिक जीवन में कई प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लड़कियों की स्थितियों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए इस दिन देशभर में कई कार्यक्रम और अभियान चलाए जाते हैं।
भारत में प्रत्येक बालिका के कुछ अधिकार हैं-
-लिंग भेदभाव के लिए अल्ट्रासाउंड परीक्षणों का उपयोग करना अवैध है। बाल विवाह पर प्रतिबंध है। राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की गई है। सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरू की है। पिछड़े वर्ग की लड़कियों के लिए ओपन लर्निंग सिस्टम का बंदोबस्त। ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के लिए बेहतरीन आजीविका सुनिश्चित करने के मकसद से कई स्वंय सहायता समूह काम कर रहे हैं। मौके पर कार्यलय कर्मी, सुमित कुमार, सुनील कुमार, मनोज कुमार रवानी आदि मौजूद रहे।