
बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देशानुसार आज दिनांक 14 अप्रैल 2023 को डॉ भीमराव अंबेडकर, बाबा साहब की 132 जयंती कार्यालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर के बैनर तले व्यवहार न्यायालय, बक्सर परिसर में स्थित भवन, विधिक सेवा सदन में माननीय ज़िला एव सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में मनाई गई। मौके पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर धर्मेंद्र कुमार तिवारी ने उपस्थित पैनल अधिवक्ताओं, पारा विधिक स्वयंसेवक एवं व्यवहार न्यायालय, बक्सर के न्यायिक कर्मचारीयों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी यहां उपस्थित होकर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 132 वी जयंती मना रहे है। जिन्हें हम बाबा साहब के नाम से भी जानते हैं। हमारे संविधान के निर्माता, दलितों के मसीहा और मानवाधिकार आंदोलन के प्रकांड विद्वता बाबा साहेब डॉक्टर भीमाराव अंबेडकर का जन्मदिवस हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है। डॉ. अंबेडकर की जयंती पर उनके जनकल्याण के लिए किए गए अभूतपूर्व योगदान को याद किया जाता है। बाबा साहेब निचले तबके से तालुक रखते थे। बचपन से ही समाजिक भेदभाव का शिकार हुए। यही वजह थी कि समाज सुधारक बाबा भीमराव अंबेडकर ने जीवन भर कमजोर लोगों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। महिलाओं को सशक्त बनाया। 14 अप्रैल 1981 को मध्यप्रदेश के महू में रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई ने अपनी सबसे छोटी संतान को जन्म दिया, जिसका नाम था भिवा रामजी अंबेडकर। बाबासाहेब के नाम से पहचाने जाने वाले आंबेडकर अपने 14 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। डॉ. अंबेडकर अछूत माने जानी वाली जाती महार के थे। ऐसे में वह बचपन से उन्हें भेदभाव और समाजिक दुराव से गुजरना पड़ा। बालपन से ही बाबासाहेब मेधावी छात्र थे. स्कूल में पढ़ाई में काबिल होने के बावजूद उनसे अछूत की तरह व्यवहार किया जाता था। उस दौर में छुआछूत जैसी समस्याएं व्याप्त होने के कारण उनकी शुरुआती शिक्षा में काफी परेशानी आई, लेकिन उन्होंने जात पात की जंजीरों को तोड़ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया और स्कूली शिक्षा पूरी की। वर्ष 1913 में बाबा अंबेडकर ने अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी से लॉ, इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में डिग्री प्राप्त की। उन्होंने भारत में लेबर पार्टी का गठन किया, आजादी के बाद कानून मंत्री बने। दो बार राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए बाबा साहेब संविधान समिति के अध्यक्ष रहे। समाज में समानता की अलख जलाने वाले अंबेडकर को 1990 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कमजोर और पिछड़ा वर्ग को समान अधिकार दिलाने, जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध कर समाज में सुधार लाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। यही वजह है कि बाबा साहेब की जयंती को भारत में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न जैसी सामाजिक बुराइयों से लड़ने, समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध कर समाज में सुधार लाने का काम किया है। मौके पर कार्यालय कर्मी सुमित कुमार, दीपेश कुमार, मनोज कुमार, सुनील कुमार सहित पैनल अधिवक्ता , चन्द्रकला वर्मा, कुमारी अरुणिमा, अशोक कुमार पाठक, कुमार मानवेंद्र, राजेश कुमार, अशोक कुमार सिन्हा, आरती राय, मधु कुमारी, कुमारी रिंकी एवं अन्य विधिक सेवक मदन प्रजापति, कविंद्र नाथ पाठक , गजेंद्र नाथ दुबे, सत्रुघन, अविनाश, हरे राम आदि उपस्थित रहे।