सिद्ध पीठ श्री हथियाराम मठ,उजियार (बलिया) में रामकथा का दिव्य प्रवाह — हजारों श्रद्धालुओं ने लिया आत्मिक आनंद
बलिया जनपद के कोरंटाडीह स्थित सिद्ध पीठ श्री हथियाराम मठ,उजियार में चल रहे श्री हरि-हरात्मक महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित रामकथा इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत केंद्र बनी हुई है। आचार्य श्री पौराणिक जी महाराज की अमृतमयी वाणी ने रामचरितमानस के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुँचाया।
प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कथा स्थल पर उपस्थित होकर श्रवण कर रहे हैं, जबकि लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से लाइव माध्यम द्वारा इस दिव्य कथा से जुड़कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
रामकथा के प्रमुख आध्यात्मिक संदेश
आचार्य जी ने कथा में “चित्र और चरित्र” के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि जहाँ चित्र और चरित्र में भेद होता है, वहाँ रावण प्रवृत्ति उत्पन्न होती है, और जहाँ दोनों में एकता होती है, वहीं रामत्व प्रकट होता है।
रामकथा को “विश्वास से विश्राम तक की यात्रा” बताते हुए उन्होंने जीवन के गूढ़ सत्य को सहज रूप में समझाया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाएँ प्रायः भ्रम और संशय से भरी होती हैं, और जो वास्तव में विचार करने योग्य है, उसे भूल जाना ही रावण वृत्ति है। रामचरितमानस का मूल उद्देश्य मन में राम के आदर्श चरित्र का विकास करना है।
कथा के दौरान गुरुतत्व की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा—
“गुरु ही सृजन, पालन और संहार के माध्यम से शिष्य को पूर्णता की ओर ले जाता है।”
उन्होंने जीवन में “प्रतीक्षा और परीक्षा” के अंतर को स्पष्ट करते हुए शबरी के उदाहरण से बताया कि ईश्वर परीक्षा का नहीं, प्रतीक्षा का विषय हैं।
जीवन दर्शन और आत्मबोध का संदेश
कथा में यह भी बताया गया कि मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए मृत्यु का स्मरण आवश्यक है।
अहंकार को सबसे बड़ा शत्रु बताते हुए कहा गया कि “जब ‘मैं’ आता है, तब सफलता भी विफलता में बदल जाती है।”
राम तत्व को समझाते हुए आचार्य जी ने कहा कि राम कोई मात्र व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सनातन धर्म के साक्षात स्वरूप हैं। सत्य तक पहुँचने के लिए ज्ञान और भक्ति दोनों मार्ग समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
इस दिव्य आयोजन में प्रतिदिन लगभग 10,000 से अधिक श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होकर कथा श्रवण कर रहे हैं। साथ ही, लाखों श्रद्धालु विभिन्न डिजिटल माध्यमों से जुड़कर इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का लाभ ले रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों एवं विदेशों से भी श्रद्धालुओं की सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हो रही हैं।
रामकथा के साथ-साथ प्रतिदिन यज्ञ, आरती, एवं मंदिर दर्शन का क्रम निरंतर चल रहा है। श्रद्धालु अत्यंत सेवा, समर्पण और भक्ति भाव से इस महायज्ञ में सहभागी बन रहे हैं। अनंत विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी आत्म प्रकाश यति जी महाराज की प्रेरणा और शिष्य मंडली के सहयोग से पूरा आयोजन भव्यता और दिव्यता के साथ संपन्न हो रहा है।
सिद्ध पीठ श्री हथियाराम मठ,उजियार की यह रामकथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मजागरण, संस्कार और जीवन परिवर्तन का एक दिव्य माध्यम बन चुकी है, जो समाज को रामत्व की ओर अग्रसर कर रही है।
“रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्ग है।”