
25 दिसंबर का दिन भारतीय लोकतंत्र के साथ दुनियाभर के लिए विशेष है। इस दिन विश्व के कई देश क्रिसमस का पर्व मनाते हैं। दूसरी तरफ यह दिन हमारी भारत भूमि के लिए भी खास है। 25 दिसंबर को भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष, भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मनाई जाती है। वहीँ भारत को विश्व के शैक्षिक क्षितिज पर प्रतिष्ठित करने वाले महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की भी जयंती मनाई जाती है। अटल जी भाजपा के पितृ पुरुष, राजनीतिक शुचिता के प्रतीक और करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत हैं। मुझसे उन्होंने कहा था कि आपके चुनाव प्रचार में आऊंगा। उनके पैरों में तकलीफ थी, फिर भी वे बिहार विधानसभा चुनाव में मेरे चुनाव प्रचार में भागलपुर आए थे। उन्हें मंच तक लाने के लिए विशेष रैम्प बनाया गया था। वे दृढ़निश्चयी थे। कई उनके साथ की यादें हैं, जो आज भी मानस पटल पर है। अटल जी कहते थे कि, “हम केवल अपने लिए ना जीएं, औरों के लिए भी जीएं…हम राष्ट्र के लिए अधिकाधिक त्याग करें। अगर भारत की दशा दयनीय है तो दुनिया में हमारा सम्मान नहीं हो सकता। किंतु यदि हम सभी दृष्टियों से सुसंपन्न हैं तो दुनिया हमारा सम्मान करेगी।” आज अटल जी की दृष्टि और सोच ही है। जिसकी बदौलत हम दुनिया के केंद्र बिंदु बनें हुए हैं। एक समय था जब छोटे-मोटे से देश भारत को धमकाने से बाज नहीं आते थे, लेकिन श्रद्धेय अटल जी के विजन को साकार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आज दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में बढ़ चले हैं।
अटल जी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व इतना विशाल है कि उसे शब्दों में सीमित नहीं किया जा सकता है। उनका जीवन एक दर्शन है। जिसे पढ़कर राजनीति की बारीकी और राष्ट्र धर्म का पालन कैसे किया जाए? यह सीखा जा सकता है। जन-गण की प्रखर आवाज और राष्ट्रधर्म के संवाहक श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच आज भले ही भौतिक रुप में उपस्थित नहीं है किन्तु उनकी बनाई परिपाटी भारतीय इतिहास में सर्वदा प्रासंगिक रहने वाली है। इतिहास में उन्हें सदैव एक युग पुरुष के रुप में याद रखा रखेगा। यह उनका सुलझा हुआ और विशाल व्यक्तित्व ही है कि उन्हें पक्ष-विपक्ष सभी जन आदर और श्रद्धा के भाव से देखते हैं। अटल जी राष्ट्र के प्रति सार्थक चिंतन मनन करने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने सदैव भारत विजय और विकास के स्वर को बुलंद किया। वे एक ऐसे मनीषी थे, जिन्हें भारत की जनता ने पांच दशक तक अपने हित की राजनीति करने के लिए चुना था। देश के समग्र विकास के प्रति सतत प्रयासरत रहने वाले अटल जी की दृष्टि में भारत का सच्चे अर्थों में विकास तभी संभव था जब यहाँ के प्रत्येक नागरिक भूख, भय, निरक्षरता और अभाव के भाव से मुक्त होकर अपना जीवन जिए।
वर्तमान की नरेंद्र मोदी सरकार उनके इसी मनोभाव को मूर्त रूप देने में लगी हुई है। अंत्योदय से भारत उदय की राह पर हमारा देश आगे बढ़ रहा है। अटलजी जब देश के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित कर रहें थे। तब उनके अटल फैसलों ने ही देश की तस्वीर बदलने की नींव रखी थी। जिसका परिणाम अब फ़लीभूत हो रहा है। 04 अक्तूबर 1977 को बतौर विदेशमंत्री उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर हिंदी को दुनिया के माथे पर बिंदी की रूप में प्रतिष्ठित किया था। भाषण के अंत में ‘जय जगत’ का वाचन उनके ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के आदर्श को ही उजागर करता है। वसुधैव कुटुम्बकम से ही वैश्विक स्तर की गम्भीर समस्याओं का हल निकल सकता है। दुनिया आज इस बात पर मुहर लगाने का काम कर रही है। हिंदी को सर्वप्रथम वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने का काम स्वामी विवेकानंद जी ने किया था। उन्हीं की परंपरा को श्रद्धेय अटल जी ने आगे बढ़ाने का काम किया। और यह बेहद सुखद है कि हमारी सरकार भी इन महापुरुषों के दिखाए मार्ग पर चल रही है।
भारतीय जनमानस के बीच प्रसिद्ध अटल बिहारी वाजपेयी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे। अटल जी राजनीति के अजातशत्रु होने के साथ एक सफल वक्ता और श्रेष्ठ कवि थे। उनकी कविताओं में राष्ट्र प्रेम और देश की प्रगति की आकांक्षा परिलक्षित होती थी।
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आदर्शों का अनुसरण करने वाले अटल जी ने अनेकों बार पार्टी लाइन से उपर उठकर राष्ट्र के जरूरी विषयों पर हस्तक्षेप किया और देखते ही देखते अटलजी की छवि एक स्टेट्समैन की हो गई, उन्होंने अपने सिद्धांतों व राजनीतिक आचार-व्यवहार से सबको प्रभावित किया। अटल जी एक ऐसे नेता माने जाते थे जो किसी भी विवाद को संवाद की ओर लेकर जाते थे। उनमें संभावनाओं की तलाश करते थे और यही कारण है कि अटल जी आज भी सभी पार्टी के कार्यकर्ताओं के मन-मस्तिष्क में ज्ञानस्वरूप बनकर स्थापित हैं। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में जहाँ स्वतंत्रता के पश्चात एक राजनीतिक पार्टी का एकछत्र राज था, उस दल के तिलिस्म को ध्वस्त कर भारतीय नागरिकों को राजनैतिक विकल्प प्रदान किया, जब सम्पूर्ण देश में कांग्रेस का वर्चस्व था तब जनसंघ जैसे नए दल और उस दल का झंडा थामे युवा अटल, दोनों के लिए रास्ते आसान नहीं थे। 1957 में जब अटल जी लोकसभा के लिए चुने गए, तब संसद में जनसंघ संख्याबल के आधार पर कांग्रेस के समक्ष चुनौती नहीं दे पा रही थी, लेकिन अटल जी ने जनसंघ को वैचारिक रूप से इतना मजबूत बना दिया कि संख्या बल मात्र एक शब्द बन कर रह गया। उनके भाषण, उनके विचार कांग्रेसी सत्ता की पेशानी पर बल ला देते थे. यहाँ यह जिक्र करना अति आवश्यक है कि अटल जी का एक लम्बा राजनीतिक समय विपक्षी नेता के रूप में व्यतीत हुआ है, लेकिन हमेशा वे सरकार की नीतियों उसकी कार्यप्रणालियों को लेकर विरोध ही करते रहे ऐसा नहीं था। वह राष्ट्रीय महत्व के विषय पर राजनीतिक एका के सबसे बड़े पक्षकार थे। जब प्रधानमंत्री बनें तब भी अटलजी सबको समान दृष्टि से देखते थे उन्होंने शासन और जन-कल्याण के एक उच्च मापदंड स्थापित किये, विश्व को भारत की शक्ति और साहस का दृढ़ता से परिचय कराया। उनके आदर्शों और मूल्यों की याद में 25 दिसंबर को प्रतिवर्ष हम सुशासन दिवस मनाते हैं। अपने शासनकाल के दौरान अटलजी ने कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शुरू किये जो भारत के विकास को नई उंचाई देने वाली थी, उनमें स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दृढ़ करना प्रमुखता से शामिल है। ये अटल जी का एक ऐसा विजन रहा, जिसकी नींव पर ही नए भारत की परिकल्पना साकार हो सकती थी। ऐसे में वर्तमान में जब हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहें हैं तो हम यह अनुभूति कर सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व भारत विकास के नए आयाम को गढ़ रहा है। आज की सरकार गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में लोक-कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से परिवर्तन लाने में सफल रही है। वहीँ देश को सशक्त और सुरक्षित रखने के लिए संकल्पबद्ध है। वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती साख सक्षम भारत का सबसे बड़ा परिचायक है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार अटल जी के सपनों को साकार के लिए प्रतिबद्ध है।
(लेखक
केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री हैं)